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क्यों जरुरी है शादी से पहले लड़का लड़की के गुण मिलना?

लड़का लड़की के गुण क्यों मिलाते है

विवाह बंधन जिसके लिए कहा जाता ये एक जन्म नही सात जन्मों का बंधन होता है। इसलिए हिन्दुधर्म में लड़का और लड़की के गुणों का मिलान किया जाता हैं ताकि उनका वैवाहिक जीवन सफल हो सके। ऐसा माना जाता है कि 36 गुणों का मिलान किया जाता है, लेकिन यदि 18 गुण भी मिल जाए तो विवाह किया जा सकता है। कहा तो ये भी जाता है कि 28 गुण मिलने पर भी विवाह उत्तम माना जाता है। ऐसा युगल जीवनभर सुख दुख में एक दूसरे का साथ निभाता है। विधान तो ये भी है कि यदि केवल 26 गुण मिले तो कुंडली देखने वाला पंडित अपनी तरफ से दो गुण दे सकता है। इस प्रकार 28 गुण होकर शादी सम्भव हो जाती है। हिन्दू समाज में रिश्ते की बात शुरू होते ही सबसे पहले कुंडली मिलान किया जाता है। स्वभाव बाद में पता चलता है पर कुंडली मिलान सबसे पहले आवश्यक माना जाता है। क्योंकि कुंडली मिलान से अप्रत्यक्ष तौर पर स्वभाव का ही पता चलता है। क्योंकि भारतीय समाज मे ज्यादातर शादियां अरेंज होती है एक दूसरे को जानने का ज्यादा समय नही मिलता, ऐसे में कुंडली मिलान एक अच्छा तरीका है एक सफल शादी के लिए।



मुख्यत 8 चीज़ों का मिलान किया जाता है

  • 1-गण  : ये 6 मिलने जरूरी है।
  • 2-नाड़ी : ये 8 मिलने जरूरी है।
  • 3-वैश्य : ये 2 मिलने जरूरी है।
  • 4-ग्रहमैत्री : ये 5 मिलने जरूरी है।
  • 5-योनि : ये 4 मिलने जरूरी है।
  • 6-वर्ण : ये 1 मिलना जरूरी है।
  • 7-तारा : ये 3 मिलने जरूरी है।
  • 8-भकूट : ये 7 मिलने जरूरी है।

कितने गुण मिलने पर कैसी रहेगी शादी

  • अगर 18 से कम गुण मिलते है तो किसी भी परिस्थिति में शादी नही की जाती, ऐसी शादी असफल मानी जाती है।
  • 18 से 25 गुण तक अगर मिल जाते है तो ये ठीक ठाक मिलान माना जाता है।
  • 26 से 32 गुणों का मिलान उत्तम माना जाता है, ऐसी शादी अच्छी शादी मानी जाती है।
  • 33 से 36 गुण मिलने पर अतिउत्तम मिलान माना जाता है, ऐसी शादी सफलतम शादी मानी जाती है।

मांगलिक दोष

जब मंगल ग्रह कुंडली के लग्न भाव अर्थात प्रथम,चौथे,सातवें,आंठवे और बारहवें भाग में स्थित होता है तो ऐसे में मांगलिक दोष माना जाता है। लड़का लड़की दोनो में किसी की भी कुंडली मे यदि मांगलिक दोष हो तो विवाह सम्भव नही होता। निम्न परिस्थितियों में मांगलिक दोष कट जाता है।

इन परिस्थितियों में मंगल दोष कारक नही माना जाता

  1. वर और कन्या की कुंडली मे से यदि एक कि कुंडली मे मंगल दोष के स्थान पर मंगल हो और दूसरे की कुंडली मे उसी स्थान पर सूर्य,शनि,राहु,केतु में से कोई ग्रह हो तो दोष नष्ट माना जाता है।
  2. कुंडली मे मंगल यदि स्वयं की राशि (मेष,वृश्चिक) मूलत्रिकोण,उच्च राशि(मकर)और मित्र राशि(सिंह ,धनु,मीन )मे हो तो दोष नही माना जाता।
  3. कुछ राशियों में मंगल के भाव का कोई प्रभाव नही होता। जैसे यदि मेष राशि का मंगल प्रथम भाव मे,धनु का बारहवें में,वृष का सातवें में,वृश्चिक का चौथे में और कुंभ का आठवें में हो तो दोष नही होता।
  4. यदि शुभ ग्रह केंद्र में हो,शुक्र दूसरे भाव मे हो,गुरु मंगल साथ मे हो,या मंगल पर गुरु की दृष्टि हो तो दोष नही होता।
  5. सिंह लग्न और कर्क लग्न में लग्नस्थ मंगल दोष नही माना जाता।
  6. यदि कन्या और वर की कुंडली मे एक की कुंडली मे मंगल मांगलिक भाव मे हो और दूसरे की कुंडली मे उन्ही भाव मे मंगल,सूर्य,राहु,केतु या शनि हो तो दोष कट जाता है।
  7. कन्या की कुंडली मे यदि ब्रहस्पति ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हो तो मांगलिक दोष नही लगता।
  8. यदि एक कुंडली मे मांगलिक दोष हो और दूसरी कुंडली के तीसरे,छठे या ग्याहरवें भाव मे राहु,मंगल या शनि हो तो दोष नष्ट माना जाता है।
  9. पांचों भाव(पहले,चौथे,सातवें, आठवें और बारहवें भाव मे ) मंगल यदि चर राशि मेष,कर्क,तुला और मकर राशि मे हो तो मांगलिक दोष नही लगता।
  10. वर की कुंडली के जिस भाव मे मंगल मांगलिक दोष बनाता है यदि कन्या के उसी भाव में सूर्य,शनि या राहु हो तो दोष नष्ट माना जाता है।

गुणों का विस्तार से मिलान

1-गण

इसमे कम से कम 6 अंक जरूरी है। इसमे स्वभाव देखा जाता है, जैसे एक के गण देव हो और दूसरे के राक्षस तो बिल्कुल ही अलग स्वभाव माना जायेगा। देवता-व्यक्ति आध्यत्मिक होता है। मनुष्य-आध्यात्म तथा भौतिकवाद का बीच सामंजस्य रखते है। राक्षस-व्यक्ति पूर्णरूप से भौतिकवादी होता है।

2-नाड़ी

स्वास्थ्य की स्थिति देखते है, 8 अंक जरूरी है इसमे। सन्तान का होना भी इसी के आधार पर देखा जाता है। आदि, मध्य, अंत तीन नाड़ीया होती है। नाड़ी दोष को सबसे बड़ा दोष माना जाता है, नाड़ी दोष अर्थात समान नाड़ी होना, इससे दोनो के विचार नही मिलते, सन्तान की संभावना कम हो जाती है। अलग अलग नाड़ी होना अच्छा सूचक होता है।

3-वैश्य

इसमे देखते है कि कौन किसको डोमिनेट करेगा। इसमे 2 अंक होना जरूरी होता है। इसको पांच प्रकार से देखते है।






  • मानव
  • वनचर
  • चातुष्पद
  • जलचर
  • जलचर कीट

4-ग्रहमैत्री

इसके लिए 5 अंक जरूरी है, ग्रहों की मित्रता और शत्रुता पर ही लड़का लड़की के आपस मे सामंजस्य की संभावना देखी जाती है। सात ग्रहों का मिलान किया जाता है।

  • सूर्य
  • चन्द्र
  • मंगल
  • बुध
  • ब्रहस्पति
  • शुक्र
  • शनि

5-योनि

इसमे लड़का लड़की की नक्षत्र की ग्रहदशा देखी जाती है, हर एक नक्षत्र एक जानवर को दर्शाता है। जैसे एक का नक्षत्र में कुत्ता हो और एक मे बिल्ली तो ये प्राकृतिक ही एक दूसरे के दुश्मन है, तो इसमे जीरो अंक मिलता है। नक्षत्र के आधार पर जानवरो के नाम है।

  • अश्व
  • गज
  • मेष
  • सर्प
  • कुत्ता
  • बिल्ली
  • चूहा
  • गाय
  • भैंस
  • चीता
  • हिरण
  • बंदर
  • नेवला
  • शेर

6-वर्ण

इसमे वर्ण अर्थात ब्राह्मण , क्षत्रिय, वैश्य, शुद्र का मिलान किया जाता है, इसमे एक अंक जरूरी है।

7-तारा

इसमे देखा जाता है कि जन्म के समय स्त्री पुरुष की तारामंडल की क्या स्थिति थी। स्वास्थ्य का मिलान इसके द्वारा होता है, 9 तारे होते है।

  • जन्म
  • संपत
  • विपाता
  • क्षेम
  • प्रत्यारी
  • साधक
  • मित्र
  • अतिमित्र

8-भकूट

इसमे राशियों का मिलान किया जाता है, 7 अंक प्राप्त होना जरूरी है। इससे दम्पत्ति की आपसी समझ, ख़ुशहाली, और समृद्धि की सम्भावना देखी जाती है।

इस प्रकार इन सभी गुणों का मिलान यथासम्भव जरूर होना चाहिए, क्योंकि एक सुखी जीवन के लिए स्वास्थ्य, मानसिक सोच, व्यवहार, एक जैसा हो तभी दाम्पत्य जीवन सुखद रह सकता है।

 
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