गाना बाँधने की रसम

क्यों बांधते है शादी में रक्षा सूत्र – गाना बाँधने की रसम

भारतीय विवाह मतलब बहुत सारे रीति-रिवाज। हालाँकि हर धरम में शादी के ये रीति-रिवाज़ बिलकुल अलग अलग है पर फिर भी हर रस्म और रिवाज़ का अपना ही महत्व है। शादी के ज्यादातर रस्म और रिवाज़ काफी पुराने समय से निभाय जा रहे है, कुछ एक रस्म ही नए है जैसे की बैचलर पार्टी। शादियों में अक्सर कुछ छोटी – छोटी रस्में भी निभाई जाती है जो की बहुत ही महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में हमारे मन में यह जानने की इच्छा बढ़ जाती की ऐसा क्यों किया जाता है। ऐसे ही कुछ छोटे छोटे रीति-रिवाजों में से एक है – रक्षा सूत्र बांधने की रस्म।



तो आइये जानते है क्या है रक्षा सूत्र बांधने की रस्म।

रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का मतलब

  • गाणा या रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का महत्व
  • पैरों में गाणा बांधने का कारण

    गाणा या रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का समय और तरीका

    गाणा खोलने की रस्म

रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का मतलब

रक्षा सूत्र दो शब्दों के मेल से बना है – रक्षा और सूत्र। रक्षा का मतलब है बचाना और सूत्र का मतलब है धागा। तो रक्षा सूत्र का मतलब हुआ वह धागा जो आपको संकट से बचाता है। इसे कई नामों ने जाना जाता है। रक्षा सूत्र को कलावा भी कहा जाता है और इसे पंजाबी भाषा में गाणा कहा जाता है। कोई भी पंजाबी शादी गाणा बांधने की रस्म के बिना पूरी नहीं हो सकती।




गाणा या रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का महत्व

हिंदू रीती रिवाज़ो में रक्षा सूत्र का बहुत ही महत्व है। हर मंगल अवसर पर या कोई भी शुभ कार्य करने से पहले रक्षा सूत्र बांधा जाता है। शादी में दूल्हा और दुल्हन को रक्षा सूत्र यानि की गाणा बांधा जाता है ताकि ये गाणा उन्हें हर बुरी नजर और बुरी शक्तियों से बचाए और उनकी रक्षा करें। इतना ही नहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भी रक्षा सूत्र का काफी महत्व है। शादी के समय दूल्हा या दूल्हे को बांधने वाले गाणे में चार चीजें लगी होती है जो की इस प्रकार है।






  • लोहे का छल्ला
  • पीली सरसों,
  • कौड़ी
  • और सुपारी।

ये चारो चीजे अलग – अलग ग्रहों का प्रतीक मानी जाती है । लोहे के छल्ले को शनि देव का, सुपारी को यम देव का, कौड़ी को श्री अर्थात लक्ष्मी माता का और पीली सरसों को राहु का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है की इन चार चीज़ों की वजह से ये ग्रह दूल्हा और दुल्हन के अनुकूल हो जाते हैं और उन पर कोई बुरा असर नहीं डालते।

पैरों में गाणा बांधने का कारण

हर व्यक्ति के अंदर जन्म से ही कुछ सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जाएं समान रूप से होती है जो इंसान के जीवन पर बहुत प्रभाव डालती है। ऐसा माना जाता है की जब शादी की समय गाणा पैरों में बांधा जाता है तो नकारात्मक ऊर्जा भी अनुकूल हो जाती है और नियंत्रण में रहती है। पैरों में गाणा बांधने पर नकारात्मक ऊर्जा अपना बुरा प्रभाव रोक देती है और ग्रहों को अपने अनुकूल करने में मदद करती है। जिससे विवाह अच्छे से संपन्न हो जाते है।

गाणा या रक्षा सूत्र बांधने की रस्म का समय और तरीका

गाणा बांधने की रस्म शादी के पहले होने वाली रस्मो में से एक है। ऐसा माना जाता है की गाणा दुल्हन और दूल्हे को बुरी नज़र और बुरी शक्तियों से बचाता है। दुल्हन पक्ष में गाणा बांधने की रस्म ज्यादातर चूड़ा चढाने की रस्म के साथ ही निभाई जाती है।

यह रस्म है छोटी सी पर बहुत ही मजेदार भी है और इस रस्म को पुरे तरीके से इसे निभाया जाता है। गाणा बांधने की रस्म का समय पंडित द्वारा दूल्हा और दुल्हन का लग्न देख कर तय किया जाता है। इतना ही नहीं दूल्हा और दुल्हन को बांधे जाने वाले इस गाणे में चार चीजों का होना जरुरी है, जो है – पीली सरसों, लोहे का छल्ला, कौड़ी और सुपारी। दूल्हा और दुल्हन दोनों की कलाई और पैरों पर यह धागा यानी की गाणा एक ही समय पर उनके घरवालों द्वारा बांधा जाता है। दुल्हन या दूल्हे को गाणा बांधते समय कुछ घर वाले काफी कसी हुई गांठ लगा देते है। ऐसा मजाक के लिए किया जाता है ताकि इस गांठ को खोलते हुए दूसरे पक्ष को पेरशानी हो और पहला पक्ष जीत जाये।

गाणा खोलने की रस्म

विवाह के संपन्न हो जाने के बाद अगले दिन दोनों वर और वधू एक दूसरे का धागा खोलते हैं। ये रस्म बहुत ही मजेदार है वर और वधु दोनों इस कोशिश में लग जाते है की पहले वो धागा खोल ले और जीत जाये। फिर दोनों का मुँह मीठा करवाया जाता है।

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